सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, रेल नीर... का क्या होगा कालिया? - FakeTalks
Media News 📽Technology 📱

सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, रेल नीर… का क्या होगा कालिया?

नमस्कार दोस्तों,

वैसे यह खबर कल की है, मगर आज भी यह बात उतना ही जरूरी है जितनी कल थी। सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर लगे बयान के बाद, अब ट्रेन में मिलने वाली पानी की बोतल का क्या होगा?

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सरकार का यह फैसला अभी कुछ समय के लिए रोक दिया गया है‌। इसका मतलब यह हुआ कि कोई सरकारी अधिकारी या फिर पुलिस वाला…. फिलहाल किसी भी दुकान पर जाकर उनकी चेकिंग यहां उन पर फाइन नहीं लगाएगा, क्योंकि सरकार ने यह बैन रोक दिया है।

पर्यावरण को देखा जाए तो सरकार का यह फैसला बहुत ही सराहनीय था, पर वहीं द छुटपुट दुकानदारों को देखा जाए तो यह अचानक से बैन उनके लिए बहुत महंगा पड़ सकता था। कुछ समय के लिए सरकार का यह फैसला टालने का इरादा, ऐसे दुकानदारों को “एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक” से दूर हटने के लिए पर्याप्त समय दे देगा।

अगर सिर्फ नीर पानी की बात की जाए तो रेलवे को तकरीबन 176 करोड़ रुपए सालाना की कमाई नीर की बिक्री से होती है। रेलवे की कुल आय को देखा जाए तो रेल नीर का हिस्सा सिर्फ 7.8 फ़ीसदी ही है। रेलवे के पास 10 प्लांट है जिनमें रेल नीर की पैकेजिंग होती है, और सन 2021 तक रेलवे बोर्ड ने 4 नए प्लांट लगाने का मंजूरी दे दी है।

यानी देखा जाए तो सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह से बहन नहीं लगाया है। योजना अनुसार सरकार ने प्लास्टिक बैग कप प्लेट छोटे बोतल स्ट्रो और कुछ चुनिंदा प्रकार के छोटे-छोटे प्लास्टिक वस्तुओं पर रोक लगाई थी। मगर अपने फैसले को कुछ समय के लिए रोक देने से, छोटे व्यापारियों को इस प्लास्टिक बैन के लिए तैयार होने का समय मिल जाएगा।

सरकार द्वारा इस बहन को तुरंत लागू नहीं करने के बावजूद भी आईआरसीटीसी के सिंगल यूज प्लास्टिक पानी की बोतल, जिसमें वह नीर जल देता था… उसकी बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग करनी शुरू कर दी है।

सूत्रों से मालूम हुआ है कि रेलगाड़ियों में पहली बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग वाली पानी की बोतल, आपको लखनऊ नई दिल्ली के रूट पर तेजस एक्सप्रेस में मिल सकती है।

एक तरफ लोगों को जागरूक और प्रेरित करने के लिए, रेलवे द्वारा लिया गया यह फैसला बहुत ही सराहनीय है। वहीं दूसरी ओर जेएनयू के छात्रों में बहुत डर का माहौल था, मगर प्रोफेसरों की मदद से उन्हें समझाया गया कि जिस सिंगल यूज़ प्लास्टिक से वह र्डर रहे हैं वह प्लास्टिक नहीं… रबड़ होता है।

मगर छात्र संगठन ने धरना देकर सरकार के सामने अपनी मांगे रखने का फैसला लिया है, छात्रों का कहना है कि यह सरकार उनसे पर्यावरण बर्बाद करने की आजादी छीन रही है।

छात्रों का साथ देते हुए कुछ अनपढ़ मीडिया वालों ने लेज चिप्स और कुरकुरे के पैकेट दिखाकर टीआरपी बनाना शुरू कर दिया है। कृपया उन्हें समझाएं कि वह पैकेट सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बहुत अलग होते हैं, वह एलुमिनियम से बने और पॉलिप्रोपिलीन से लैमिनेटेड होते है। जिनको प्लास्टिक पैरालिसिस प्रोसेस के माध्यम से दोबारा रीसायकल किया जा सकता है।

ऊपर वाली बात हमने कई नेताओं को समझाने की कोशिश की, मगर कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया हमें ही समझ नहीं आई। राहुल जी के भौचक्के हो कर हमें देखने के तरीके से ही हम समझ गए थे कि अंदर क्या चल रहा है। हमारी बात सुनने के कुछ समय की शान्ति के बाद केजरीवाल जी ने कहा: मोदी जी हमें काम ही नहीं करने देते।

हमारे संवाददाताओं ने बहुत खोजबीन के बाद यह गहरा राज ढूंढ निकाला है। आधुनिक भारत में छुपी हुई एक कला जो हर बॉयज हॉस्टल के लड़के को मालूम होती है…. सिंगल यूज़ प्लास्टिक को भी 4-6 महीने तक कैसे इस्तेमाल करना है। हम अपने सूत्रों के सहयोग से आपके लिए यह खबर लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

कृपया हमारे साथ बने रहे, नमस्कार।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close